
4 अप्रैल 2026, काठमांडू: नेपाल में पेट्रोल और डीजल का संकट अब चरम पर पहुंच गया है। सरकार ने आज एक बड़ा फैसला लिया है – सरकारी कार्यालयों में हफ्ते में 2 दिन छुट्टी घोषित कर दी गई है। नए टाइम टेबल के मुताबिक अब नेपाल के सभी सरकारी दफ्तर सोमवार से शुक्रवार तक ही काम करेंगे, जबकि शनिवार और रविवार को पूरी तरह बंद रहेंगे।
यह फैसला पेट्रोल की भारी कमी और बढ़ते आयात बिल को काबू में करने के लिए लिया गया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने स्पष्ट कहा है कि यह अस्थायी व्यवस्था है, लेकिन संकट गहराने पर इसे और सख्त भी किया जा सकता है।
पेट्रोल संकट का पूरा विवरण: क्यों पहुंचा यह हाल?
नेपाल पूरी तरह से भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। पिछले कुछ महीनों से भारत-नेपाल के बीच ईंधन सप्लाई में व्यवधान, अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और नेपाल की विदेशी मुद्रा भंडार की कमी ने मिलकर यह संकट खड़ा कर दिया है।
वर्तमान में नेपाल के पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। कई जगहों पर पेट्रोल और डीजल पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल के पास केवल 10-12 दिनों का ईंधन स्टॉक बचा है। इस स्थिति में सरकार ने ईंधन बचत के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
नए आदेश के अनुसार:
- सरकारी दफ्तर सोमवार से शुक्रवार तक 10:00 बजे से 16:00 बजे तक खुलेंगे (6 घंटे काम)।
- शनिवार और रविवार को पूरी तरह बंद।
- सभी सरकारी वाहनों का इस्तेमाल 50% तक कम किया जाएगा।
- निजी क्षेत्र को भी ईंधन बचत के लिए अपील की गई है।
सरकार का फैसला: बचत या मजबूरी?
सरकार का कहना है कि यह फैसला पेट्रोल की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए जरूरी है। नेपाल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स लिमिटेड (NOCL) के अनुसार, रोजाना 1.2 करोड़ लीटर ईंधन की खपत होती है, जो देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बोझ है।
वित्त मंत्री ने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि आम नागरिकों को पेट्रोल मिलता रहे। इसलिए सरकारी खपत को कम करना जरूरी था।”
आम जनता और निजी क्षेत्र पर क्या असर?
यह फैसला सीधे नेपाल की 30 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों और लाखों लोगों को प्रभावित करेगा।
- बैंक, पोस्ट ऑफिस, अस्पतालों के प्रशासनिक कार्य प्रभावित होंगे।
- सरकारी काम में देरी बढ़ सकती है।
- निजी कंपनियां भी ईंधन बचत के लिए अपने ऑफिस टाइम में बदलाव पर विचार कर रही हैं।
- पर्यटन क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा क्योंकि सरकारी दफ्तर बंद रहने से कई सेवाएं प्रभावित होंगी।
काठमांडू घाटी में पहले से ही पेट्रोल की किल्लत है। लोग घंटों लाइन में खड़े रहकर पेट्रोल भरवा रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विपक्षी दल ने सरकार पर नाकामी का आरोप लगाया है। नेपाली कांग्रेस के नेता ने कहा, “सरकार ईंधन संकट का सामना करने में पूरी तरह विफल रही है। 2 दिन छुट्टी देना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि समस्या को छुपाने की कोशिश है।”
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल ने इसे “राष्ट्रीय संकट” बताया और सभी दलों से सहयोग की अपील की।
नेपाल में पिछले पेट्रोल संकट
यह पहली बार नहीं है जब नेपाल में ईंधन संकट आया हो।
- 2015 में भारत के साथ सीमा विवाद के दौरान 6 महीने तक संकट रहा था।
- 2022 में भी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कीमतें बढ़ी थीं।
- लेकिन 2026 का यह संकट सबसे गंभीर माना जा रहा है क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार भी कम है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नेपाल को दीर्घकालिक समाधान ढूंढना चाहिए।
- भारत से आयात पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशने चाहिए।
- हाइड्रोपावर और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए।
- ईंधन की कीमतों में सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना चाहिए।
सरकार की अन्य बचत योजनाएं
- सरकारी वाहनों का उपयोग 50% कम।
- रात 9 बजे के बाद अनावश्यक स्ट्रीट लाइट बंद।
- सभी सरकारी मीटिंग्स वर्चुअल मोड में करने का निर्देश।
- पेट्रोल पंपों पर कोटा सिस्टम लागू।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. नेपाल में सरकारी दफ्तर अब कब खुलेंगे?
सोमवार से शुक्रवार तक 10:00 बजे से 16:00 बजे तक। शनिवार-रविवार बंद रहेंगे।
2. यह फैसला कब से लागू होगा?
तुरंत प्रभाव से, यानी 6 अप्रैल 2026 से।
3. पेट्रोल संकट की मुख्य वजह क्या है?
भारत से आयात कम होना, विदेशी मुद्रा की कमी और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी।
4. आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकारी कामों में देरी, बैंक और अन्य सेवाओं में भीड़ बढ़ सकती है।
5. क्या निजी क्षेत्र पर भी यह नियम लागू होगा?
नहीं, लेकिन सरकार ने उन्हें भी ईंधन बचत के लिए अपील की है।
6. पेट्रोल पंपों पर स्थिति क्या है?
कई जगहों पर पेट्रोल और डीजल की कमी है, लंबी कतारें लग रही हैं।
7. सरकार ने कितने दिनों का ईंधन स्टॉक बताया है?
केवल 10-12 दिनों का स्टॉक बचा है।
8. क्या यह छुट्टी स्थायी है?
नहीं, यह अस्थायी है। संकट कम होने पर वापस पुराना टाइम टेबल लागू होगा।
9. विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया है?
विपक्ष इसे सरकार की नाकामी बता रहा है।
10. नेपाल सरकार आगे क्या कदम उठा सकती है?
ईंधन आयात बढ़ाने, वैकल्पिक स्रोत तलाशने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।

