EVM विवाद 2026: तकनीक भरोसेमंद या साजिश? जानिए दोनों पक्ष का बयान

EVM विवाद 2026: तकनीक भरोसेमंद या साजिश? जानिए दोनों पक्ष का बयान

चुनाव नतीजों की गिनती चल रही है और एक बार फिर पूरे देश में EVM को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग कह रहे हैं कि EVM पूरी तरह भरोसेमंद है, तो कुछ कह रहे हैं कि इसमें गड़बड़ी हो सकती है। सोशल मीडिया पर #EVM_Hack और #SaveDemocracy जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। आम आदमी कन्फ्यूज है – आखिर EVM सही है या नहीं? आज हम सरल भाषा में दोनों पक्षों को समझते हैं, बिना किसी पक्षपात के।

EVM क्या है और क्यों शुरू किया गया?

EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन। साल 2004 से भारत में बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रही है। पहले बैलेट पेपर से वोटिंग होती थी, जो बहुत समय लेती थी और कई बार झगड़े भी होते थे। EVM लाने का मुख्य मकसद था वोटिंग को तेज, साफ और कम खर्चीला बनाना।

अब एक वोट डालने में सिर्फ सेकंड लगता है। गिनती भी बहुत जल्दी हो जाती है।

EVM के पक्ष में तर्क

EVM के समर्थक कहते हैं कि यह सिस्टम काफी अच्छा है। उनके मुख्य तर्क ये हैं:

  • बूथ कैप्चरिंग लगभग खत्म: पहले पेपर बैलेट में गुंडे पोलिंग बूथ पर कब्जा कर लेते थे। EVM में ऐसा करना बहुत मुश्किल है।
  • गिनती तेज: पहले गिनती में कई दिन लग जाते थे। अब कुछ घंटों में नतीजे आ जाते हैं।
  • कम खर्च: पेपर बैलेट छापने, रखने और जला देने का खर्च बचता है।
  • VVPAT से पारदर्शिता: Voter Verifiable Paper Audit Trail के जरिए मतदाता देख सकता है कि उसका वोट सही पार्टी को गया है या नहीं।
  • चुनाव आयोग का दावा: EVM पूरी तरह ऑफलाइन है, हैक नहीं हो सकती।

चुनाव आयोग कहता है कि EVM पर 20 साल से कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं हुई है।

EVM के खिलाफ तर्क

विपक्षी पार्टियां और कुछ विशेषज्ञ EVM पर सवाल उठाते हैं। उनके मुख्य तर्क ये हैं:

  • हैकिंग का खतरा: कुछ टेक्नीशियन कहते हैं कि EVM को हैक किया जा सकता है। हालांकि आयोग इसे खारिज करता है।
  • VVPAT स्लिप की समस्या: कई बार VVPAT स्लिप नहीं निकलती या गिनती में मैच नहीं करती।
  • कोडिंग का राज: EVM को कौन कोड करता है? क्या इसमें कोई गड़बड़ी की जा सकती है?
  • रैंडमाइजेशन: विपक्ष कहता है कि EVM में वोटों का रैंडमाइजेशन ठीक से नहीं होता।
  • पुरानी मशीनें: कुछ EVM 15-20 साल पुरानी हैं, उनमें खराबी हो सकती है।

कई विपक्षी नेता बैलेट पेपर पर वापस जाने की मांग कर रहे हैं।

चुनाव आयोग का स्टैंड

चुनाव आयोग ने कई बार कहा है कि EVM सबसे सुरक्षित और पारदर्शी सिस्टम है। उन्होंने कहा:

  • EVM कभी इंटरनेट से नहीं जुड़ी होती
  • हर EVM पर कई लेयर की सुरक्षा
  • VVPAT से 5% वोटों की रैंडम ऑडिट होती है
  • अगर VVPAT और EVM में अंतर पाया गया तो वोट रद्द कर दिए जाते हैं

आयोग ने विपक्ष को कई बार EVM की डेमो दिखाई है, लेकिन विवाद थम नहीं रहा है।

सुप्रीम कोर्ट क्या कह चुका है?

सुप्रीम कोर्ट ने EVM पर कई याचिकाएं सुनी हैं। कोर्ट ने कहा है कि EVM में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं पाई गई है। लेकिन कोर्ट ने VVPAT की संख्या बढ़ाने और ज्यादा पारदर्शिता की सलाह भी दी है।

आम आदमी क्या सोचता है?

सामान्य लोग दो तरह के हैं। कुछ कहते हैं – “EVM से चुनाव जल्दी खत्म होते हैं, अच्छा है।” कुछ कहते हैं – “मुझे यकीन नहीं होता, बैलेट पेपर से ही वोटिंग होनी चाहिए।”

दोनों पक्षों के बीच संतुलन की जरूरत

EVM विवाद सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि विश्वास का भी है। अगर लोग EVM पर भरोसा नहीं करेंगे तो लोकतंत्र कमजोर हो जाएगा।

समाधान के रूप में कुछ सुझाव:

  • VVPAT की संख्या बढ़ाकर 50% कर दी जाए
  • EVM की कोडिंग और रखरखाव पर ज्यादा पारदर्शिता
  • स्वतंत्र एजेंसियों से रेगुलर ऑडिट
  • लोगों को EVM की ट्रेनिंग दी जाए

FAQ – EVM विवाद 2026

1. EVM क्या है और यह कब से इस्तेमाल हो रही है?

EVM यानी Electronic Voting Machine। भारत में इसे 2004 से बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

2. EVM पर विवाद क्यों है?

कुछ लोग कहते हैं कि EVM हैक हो सकती है या इसमें गड़बड़ी की जा सकती है। विपक्ष बैलेट पेपर पर वापस जाने की मांग कर रहा है।

3. चुनाव आयोग EVM को सुरक्षित क्यों मानता है?

आयोग का कहना है कि EVM इंटरनेट से नहीं जुड़ी होती, इसलिए हैकिंग मुश्किल है। साथ में VVPAT भी लगी होती है।

4. VVPAT क्या है?

VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) एक स्लिप है जो मतदाता को दिखाती है कि उसका वोट किस पार्टी को गया।

5. क्या EVM हैक हो सकती है?

कई टेक्निकल विशेषज्ञ कहते हैं कि संभव है, लेकिन चुनाव आयोग इसे पूरी तरह खारिज करता है।

6. सुप्रीम कोर्ट ने EVM पर क्या कहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि EVM में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली है, लेकिन VVPAT की संख्या बढ़ाने की सलाह दी है।

7. EVM के फायदे क्या हैं?

  • वोटिंग तेज होती है
  • गिनती जल्दी हो जाती है
  • बूथ कैप्चरिंग कम हुई है
  • खर्च कम होता है

8. EVM के नुकसान क्या हैं?

  • हैकिंग का डर
  • पुरानी मशीनें
  • आम लोगों में विश्वास की कमी

9. 2026 चुनाव में EVM पर बहस क्यों तेज हुई?

कुछ राज्यों में शुरुआती रुझान के बाद विपक्ष ने आरोप लगाए कि EVM से गड़बड़ी हो रही है।

10. आखिर में क्या होना चाहिए?

EVM को और पारदर्शी बनाना चाहिए। VVPAT की संख्या बढ़ाई जाए और स्वतंत्र ऑडिट हो। लोगों का विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।


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