13 मई 2026: दिल्ली के जंतर मंतर पर आज भी प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा है। NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। ‘Cockroach Janta Party’ (CJP) के बैनर तले हजारों युवा जंतर मंतर पर डटे हुए हैं। विपक्षी नेताओं का समर्थन मिलने से आंदोलन और जोर पकड़ रहा है।
जंतर मंतर, जो लोकतंत्र की आवाज का प्रतीक माना जाता है, आज फिर से गुस्से और उम्मीद का केंद्र बन गया है। आइए जानते हैं कि आखिर इस प्रदर्शन में क्या हो रहा है, क्यों इतना गुस्सा है और आगे क्या हो सकता है।
जंतर मंतर पर क्या चल रहा है?
आज सुबह से ही जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
मुख्य मांगें:
- NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- परीक्षा सुधार और छात्रों की सुरक्षा
- पुलिस कार्रवाई की जांच
छात्रों ने नारे लगाए, थालियां बजाईं और दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सोनम वांगचुक जैसे एक्टिविस्ट्स का समर्थन भी मिल रहा है।
विपक्ष का समर्थन
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेता जंतर मंतर पहुंच रहे हैं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं ने छात्रों के साथ खड़े होने का ऐलान किया है।
विपक्ष का कहना है कि सरकार परीक्षा घोटालों पर चुप्पी साधे हुए है और छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर के आसपास भारी सुरक्षा बंदोबस्त किया है।
सुरक्षा के इंतजाम:
- भारी संख्या में CRPF और दिल्ली पुलिस जवान तैनात
- संसद की तरफ मार्च रोकने के लिए बैरिकेडिंग
- ट्रैफिक डायवर्जन
- जंतर मंतर से संसद मार्च पर रोक
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, इसके लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।
छात्रों का गुस्सा क्यों?
छात्रों का कहना है कि:
- NEET और अन्य परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं
- गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों का भविष्य खतरे में है
- सरकार सिर्फ वादे करती है, लेकिन अमल नहीं करती
- पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए हैं
राजनीतिक विश्लेषण
यह प्रदर्शन सिर्फ छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष का सरकार के खिलाफ एकजुट होने का मौका भी है।
संभावित परिणाम:
- अगर सरकार जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती तो आंदोलन और फैल सकता है
- संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा गरमाएगा
- छात्रों का गुस्सा युवा वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है
आम लोगों पर असर
दिल्ली में ट्रैफिक जाम, सुरक्षा व्यवस्था और दैनिक जीवन पर असर पड़ रहा है। कई लोग कह रहे हैं कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
छात्रों की आवाज सुनी जाए
जंतर मंतर पर चल रहा प्रदर्शन लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं, तो सरकार को भी उन्हें सुनना चाहिए।
समाधान का रास्ता:
- निष्पक्ष जांच
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई
- परीक्षा प्रणाली में सुधार
- छात्रों से संवाद
आखिरकार, युवाओं का भविष्य देश का भविष्य है। अगर हम उनकी आवाज नहीं सुनेंगे तो कल देश की प्रगति कैसे होगी?
जंतर मंतर पर आज जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग है। उम्मीद है कि सरकार और छात्र दोनों मिलकर कोई सकारात्मक रास्ता निकालेंगे।
✅ FAQ
1. जंतर मंतर पर अभी क्या चल रहा है?
छात्रों और CJP (Cockroach Janta Party) के समर्थकों का प्रदर्शन जारी है। NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है।
2. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
- NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
- परीक्षा सुधार और छात्रों की सुरक्षा
3. विपक्ष का क्या रुख है?
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल छात्रों का समर्थन कर रहे हैं। राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेता जंतर मंतर पहुंचे हैं।
4. दिल्ली पुलिस ने क्या इंतजाम किए हैं?
भारी संख्या में CRPF और दिल्ली पुलिस जवान तैनात हैं। संसद की तरफ मार्च रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है और ट्रैफिक डायवर्जन लागू है।
5. सोनम वांगचुक की क्या भूमिका है?
सोनम वांगचुक इस आंदोलन के प्रमुख चेहरे हैं। उन्होंने लंबे समय तक भूख हड़ताल भी की थी।
6. प्रदर्शन कितने दिन से चल रहा है?
यह प्रदर्शन कई दिनों से जारी है। पुलिस कार्रवाई के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने फिर से जंतर मंतर पर डेरा जमाया है।
7. क्या संसद की तरफ मार्च निकाला जाएगा?
प्रदर्शनकारी संसद की तरफ मार्च निकालना चाहते हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसे रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।
8. आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक जाम है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
9. सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
सरकार का कहना है कि छात्रों की मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।
10. आगे क्या हो सकता है?
अगर सरकार जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती तो आंदोलन और फैल सकता है। संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा गरमाएगा।

