1960 के दशक के बॉम्बे (अब मुंबई) की धुआं से भरी और रोशनियों वाली सड़कों के बीच एक नया साम्राज्य बन रहा था। यह साम्राज्य बंदूकों या ज़मीन से नहीं, बल्कि कागज़ के टुकड़ों, ताश के पत्तों और एक मिट्टी के ‘मटके’ से बनाया जा रहा था। अप्रैल 2026 में अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ “मटका किंग” (Matka King) हमें इसी दिलचस्प दौर में ले जाती है। मशहूर डायरेक्टर नागराज मंजुले द्वारा निर्देशित और विजय वर्मा की शानदार एक्टिंग से सजी यह सीरीज़ लोगों को बहुत पसंद आ रही है।
लेकिन “मटका किंग” को जो बात सबसे खास बनाती है, वह यह है कि यह असल घटनाओं (Real Story) से प्रेरित है। सीरीज़ में ‘बृज भाटी’ का किरदार असल ज़िंदगी के रतन खत्री (Ratan Khatri) पर आधारित है, जो मुंबई के कपड़ा बाज़ार से उठकर भारत के अंडरग्राउंड सट्टा बाज़ार का बेताज बादशाह बन गया था।
अगर आपने यह वेब सीरीज़ देखी है और आपके मन में सवाल हैं कि इसमें कितनी सच्चाई है और कितनी कहानी, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। यहाँ हम आपको ‘सट्टा मटका’ के इतिहास, इसके असली पायनियर्स और सीरीज़ से जुड़ी पूरी कहानी आसान भाषा में बताएंगे।
1. सट्टा मटका की शुरुआत: न्यूयॉर्क से बॉम्बे तक
सीरीज़ को समझने के लिए सबसे पहले उस खेल को समझना होगा जिसने यह सब शुरू किया। इंटरनेट कसीनो और ऑनलाइन सट्टा ऐप्स के आने से बहुत पहले, भारत में सट्टा लगाने के लिए लोगों को खुद मौजूद रहना पड़ता था।
20वीं सदी की शुरुआत में बॉम्बे के मिल इलाकों में एक गेम बहुत मशहूर था। लोग कॉटन (कपास) के खुलने और बंद होने वाले रेट पर सट्टा लगाते थे। ये रेट न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज (New York Cotton Exchange) से टेलीप्रिंटर के ज़रिए बॉम्बे कॉटन एक्सचेंज तक आते थे। मिल वर्कर, व्यापारी और आम लोग इस बात पर पैसा लगाते थे कि कॉटन के रेट का आखिरी नंबर क्या होगा। यह पूरी तरह किस्मत का खेल था, जिसने दिहाड़ी मज़दूरों को जल्दी पैसा कमाने का एक रास्ता दे दिया था।
लेकिन 1960 के दशक की शुरुआत में, न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज ने अचानक ये नंबर भेजना बंद कर दिया। रातों-रात लोकल सट्टा बाज़ार ठप हो गया। अब सटोरियों (Bookies) को एक नए तरीके की तलाश थी ताकि उनका धंधा चलता रहे।
यहीं से जन्म हुआ “मटका” का। विदेश से आने वाले नंबरों का इंतज़ार करने के बजाय, बुकीज़ ने पर्चियों पर नंबर लिखकर उन्हें एक बड़े मिट्टी के मटके में डालना शुरू किया। फिर मटके में से पर्ची निकालकर लकी नंबर घोषित किया जाता था। यह सिस्टम बहुत आसान था और इसे विदेश के मार्केट की भी ज़रूरत नहीं थी।
2. असली किंग: कल्याणजी भगत और रतन खत्री
हालांकि वेब सीरीज़ बृज भाटी पर फोकस करती है, लेकिन असल ज़िंदगी में मटका साम्राज्य दो लोगों ने खड़ा किया था: कल्याणजी भगत और रतन खत्री।
कल्याणजी भगत: पहला पायनियर
कल्याणजी भगत गुजरात के कच्छ से बॉम्बे आए थे और शुरुआत में किराने की दुकान चलाते थे। 1962 में, जब न्यूयॉर्क के नंबर आने बंद हुए, तो भगत ने “वर्ली मटका” (Worli Matka) नाम से सट्टे का पहला लोकल सिस्टम शुरू किया। यह गेम हफ्ते के सातों दिन चलता था और इसमें आम लोग सिर्फ एक रुपये से भी सट्टा लगा सकते थे, इसलिए यह बहुत तेज़ी से पॉपुलर हो गया।
रतन खत्री: मटका किंग

फिर एंट्री हुई रतन खत्री की। 1932 में कराची में जन्मे खत्री, 1947 के बंटवारे के बाद भारत आ गए। शुरुआत में उन्होंने कल्याणजी भगत के साथ एक मैनेजर के तौर पर काम किया। खत्री का दिमाग नंबरों और लोगों की साइकोलॉजी (Psychology) पढ़ने में बहुत तेज़ था।
1964 में, खत्री और भगत के बीच अनबन हो गई। खत्री ने अलग होकर अपना नया सट्टा शुरू किया, जिसे “न्यू वर्ली मटका” (जो बाद में ‘मेन बाज़ार मटका’ बना) कहा गया। भगत का गेम सातों दिन चलता था, लेकिन खत्री ने इसे सिर्फ सोमवार से शुक्रवार (5 दिन) तक ही चलाया।
खत्री को ‘मटका किंग’ बनाने वाली सबसे बड़ी चीज़ थी उनकी ईमानदारी (Transparency)। सट्टे के बाज़ार में जहां अक्सर धोखाधड़ी होती थी, खत्री ने मटके की जगह ताश के पत्तों (Playing Cards) का इस्तेमाल शुरू किया। वह अक्सर सड़क पर, कैफे में या पत्रकारों के सामने किसी आम आदमी से ताश के 3 पत्ते निकलवाते थे। इससे लोगों का भरोसा उन पर बहुत बढ़ गया और उनका मटका बिज़नेस आसमान छूने लगा।
3. मटका साम्राज्य का सुनहरा दौर (Golden Era)
1960 और 70 के दशक तक, मटका सिर्फ एक छोटा सट्टा नहीं रहा था, बल्कि यह एक समानांतर अर्थव्यवस्था (Parallel Economy) बन चुका था।
बिज़नेस का साइज़:
अपने चरम (Peak) पर, रतन खत्री के मटका बिज़नेस का रोज़ का टर्नओवर लगभग ₹1 करोड़ था—जो उस ज़माने में एक बहुत बड़ी रकम थी। देश में जहां भी टेलीफोन की लाइनें थीं, वहां तक मटका का नेटवर्क फैला था। एजेंट रोज़ाना कैश जमा करते थे और खत्री के हेडक्वार्टर तक जानकारी पहुंचाते थे।
सबके लिए सट्टा:
अमेज़न प्राइम की सीरीज़ इस बात को बहुत अच्छे से दिखाती है कि कैसे मटका ने सट्टेबाजी को आम आदमी तक पहुंचाया। पहले बड़े दांव सिर्फ अमीर लोग रेसकोर्स (Racecourse) में लगाते थे। खत्री के सिस्टम ने इस रोमांच को मिल मज़दूरों, टैक्सी ड्राइवरों और आम गृहणियों तक पहुंचा दिया।
4. बॉलीवुड और मटका का कनेक्शन
मुंबई में पैसे और पावर की कोई कहानी बॉलीवुड (Bollywood) के बिना पूरी नहीं होती। रतन खत्री का उठना-बैठना फिल्म स्टार्स, डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स के साथ होने लगा।
खत्री ने 1976 में आई बॉलीवुड फिल्म ‘रंगीला रतन’ (Rangila Ratan) में पैसा लगाया था, जिसमें ऋषि कपूर, परवीन बाबी और अशोक कुमार जैसे बड़े स्टार्स थे। खत्री ने खुद इस फिल्म में एक छोटा सा रोल (Cameo) भी किया था।
मशहूर एक्टर ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लम खुल्ला’ में बताया है कि खत्री अक्सर शूटिंग के बाद उनके या अशोक कुमार के पास आते थे और ताश का एक पत्ता निकालने को कहते थे। कुछ ही मिनटों में वह नंबर पूरे मुंबई में आज का ‘लकी मटका नंबर’ बनकर फैल जाता था।
5. साम्राज्य का पतन: पुलिस और अंडरवर्ल्ड
हर बड़े साम्राज्य की तरह मटका का भी अंत होना था। इसका पतन 1970 के दशक के मध्य में शुरू हुआ।
इमरजेंसी (1975–1977):
जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी (Emergency) लगाई, तो पुलिस ने अंडरग्राउंड बिज़नेस पर भारी कार्रवाई की। कई बड़े बुकी पकड़े गए या छिप गए। रतन खत्री को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्होंने 19 महीने जेल में बिताए।
अंडरवर्ल्ड की एंट्री:
जब खत्री जेल से बाहर आए, तो मुंबई बदल चुकी थी। सट्टे के इस ‘साफ-सुथरे’ बिज़नेस में दाऊद इब्राहिम जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन और गैंगस्टर्स ने एंट्री कर ली थी। अंडरवर्ल्ड के आने से सट्टेबाज़ी में खून-खराबा, हफ्ता वसूली और पुलिस का दबाव बहुत बढ़ गया।
खत्री इस गैंगवार का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। 1990 के दशक तक आते-आते उन्होंने इस बिज़नेस से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया। उनके हटने के बाद, सट्टा मटका कई छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गया और बाद में इसकी जगह क्रिकेट सट्टेबाजी और ऑनलाइन लॉटरी ने ले ली। 9 मई 2020 को 88 वर्ष की आयु में रतन खत्री का निधन हो गया।
6. Amazon Prime की “मटका किंग” (Matka King Series)
17 अप्रैल 2026 को रिलीज़ हुई मटका किंग सीरीज़ इस पूरे दौर को एक बेहतरीन ड्रामा के रूप में पेश करती है। ‘सैराट’ जैसी फिल्मों के डायरेक्टर नागराज मंजुले ने 1960 के दशक के बॉम्बे को बहुत ही शानदार तरीके से पर्दे पर उतारा है।
विजय वर्मा की शानदार एक्टिंग:
बृज भाटी (रतन खत्री पर आधारित) के रोल में विजय वर्मा ने जान डाल दी है। उन्होंने दिखाया है कि कैसे एक आम आदमी तेज़ दिमाग और हिम्मत के बल पर इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा कर सकता है। सीरीज़ यह भी सवाल उठाती है कि क्या बृज भाटी गरीबों का मसीहा था या उनकी मजबूरी का फायदा उठाने वाला क्रिमिनल?
अन्य कास्ट:
- सई ताम्हणकर (Sai Tamhankar) ने बृज की पत्नी का रोल प्ले किया है।
- कृतिका कामरा (Kritika Kamra) गुलरुख के रोल में हैं, जो बाद में ‘मटका क्वीन’ बनती हैं।
- गुलशन ग्रोवर (Gulshan Grover) ने लालजी भाई का नेगेटिव रोल किया है, जो बृज का शुरुआती बॉस होता है।
7. Web Series से जुड़े असली विवाद (Controversies)
सीरीज़ के रिलीज़ होने से ठीक पहले, यह कानूनी पचड़ों में फंस गई थी। वर्ली मटका के असली संस्थापक कल्याणजी भगत की पोती, तनुजा भगत ने मेकर्स के खिलाफ केस दर्ज कर दिया था। उनका कहना था कि मेकर्स ने उनके परिवार की कहानी का इस्तेमाल बिना उनकी अनुमति (Consent) के किया है। हालांकि सीरीज़ बाद में रिलीज़ हो गई, लेकिन इससे पता चलता है कि मटका दौर की यादें आज भी कई परिवारों के लिए बहुत ताज़ा हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs – Frequently Asked Questions)
Q1: क्या ‘मटका किंग’ वेब सीरीज़ सच्ची कहानी (Real Story) पर आधारित है?
हां, यह सीरीज़ 1960 के दशक के बॉम्बे की असली घटनाओं से प्रेरित है। मुख्य किरदार बृज भाटी, असल ज़िंदगी के ‘सट्टा मटका किंग’ रतन खत्री से प्रेरित है।
Q2: रतन खत्री (Ratan Khatri) कौन थे?
रतन खत्री भारत के सबसे बड़े सटोरियों (Bookies) में से एक थे। उन्हें 1960 और 70 के दशक में भारत में “सट्टा मटका” को एक बड़ा और ऑर्गेनाइज़्ड बिज़नेस बनाने का श्रेय दिया जाता है।
Q3: सट्टा मटका (Satta Matka) क्या होता है?
सट्टा मटका भारत में एक तरह का लॉटरी और जुआ (Gambling) था। पहले इसमें न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज के रेट्स पर सट्टा लगता था। बाद में इसे एक मटके या ताश के पत्तों से रैंडम नंबर निकालकर खेला जाने लगा।
Q4: “मटका किंग” सीरीज़ कब रिलीज़ हुई और मैं इसे कहाँ देख सकता हूँ?
यह सीरीज़ 17 अप्रैल 2026 को रिलीज़ हुई है। आप इसे अमेज़न प्राइम वीडियो (Amazon Prime Video) पर देख सकते हैं।
Q5: “मटका किंग” सीरीज़ का डायरेक्टर कौन है?
इस सीरीज़ का निर्देशन (Direction) मशहूर फिल्ममेकर नागराज मंजुले (Nagraj Manjule) ने किया है, जो अपनी सुपरहिट फिल्म ‘सैराट’ के लिए जाने जाते हैं।
Q6: वेब सीरीज़ की मुख्य स्टार कास्ट कौन है?
लीड रोल (बृज भाटी) में विजय वर्मा हैं। उनके साथ कृतिका कामरा, सई ताम्हणकर और गुलशन ग्रोवर ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
Q7: असली मटका साम्राज्य कैसे खत्म हुआ?
इमरजेंसी (1975-1977) के दौरान पुलिस की सख्ती से यह बिज़नेस कमज़ोर पड़ा। बाद में जब दाऊद इब्राहिम जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन ने इसमें एंट्री की, तो रतन खत्री ने गैंगवार से बचने के लिए खुद को इस बिज़नेस से अलग कर लिया।
Q8: क्या रतन खत्री का बॉलीवुड से कोई संबंध था?
हां, रतन खत्री ने 1976 की बॉलीवुड फिल्म ‘रंगीला रतन’ को फाइनेंस किया था, जिसमें ऋषि कपूर हीरो थे। उस समय फिल्म इंडस्ट्री के बड़े लोगों में उनका उठना-बैठना था।
Q9: ‘मटका’ शब्द का मतलब क्या है?
‘मटका’ का मतलब मिट्टी का घड़ा (Earthen Pot) होता है। शुरुआत में सट्टे की पर्चियां इसी मटके से निकाली जाती थीं, इसलिए इस खेल का नाम ही ‘सट्टा मटका’ पड़ गया।

